स्कूल के दोस्तों की यादें (कविता) स्कूल के दिन और दोस्त ।
वो स्कूल के दिन भी क्या दिन थे,
जब हर पल साथ बिताते थे।
ना कोई फिक्र, ना कोई डर,
बस हँसते-हँसाते जी जाते थे।
वो बेंच पर बैठकर बातें करना,
टीचर की डाँट में भी मुस्कुराना।
चोरी-चोरी हँसना, इशारे करना,
और छोटी-छोटी बातों पे रूठ जाना।
आज वही दोस्त दूर कहीं हैं,
सब अपनी दुनिया में खो गए।
वो गलियारे, वो मैदान खाली हैं,
जहाँ कभी हम साथ में रो गए।
12th के बाद रास्ते बदल गए,
मुलाकातें जैसे रुक सी गईं।
फोन में नंबर तो आज भी हैं,
पर बातें कहीं थम सी गईं।
कभी-कभी यादों का मौसम आता है,
दिल फिर उन्हीं गलियों में चला जाता है।
जहाँ दोस्ती सिर्फ एक शब्द नहीं थी,
वो तो जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन जाता है।
काश फिर वो दिन लौट आते,
हम फिर से वही शरारतें करते।
ना कोई दूरी, ना कोई मजबूरी,
बस दोस्तों के संग फिर जी भर के जीते।
💬 Conclusion (निष्कर्ष):
स्कूल के दोस्तों की यादें कभी पुरानी नहीं होतीं। भले ही जिंदगी हमें अलग रास्तों पर ले जाए, लेकिन दिल में बसने वाली दोस्ती हमेशा खास रहती है। स्कूल के दिन और दोस्त ।

